जैसे कि आप सभी को पहले बता चुका हूँ कि नवग्रहीय व्यवस्था में मन का कारकत्व चन्द्रमा को प्राप्त है,सबसे पहले हमें चन्द्रमा को जानना होगा,जैसा कि आप सभी लोग जानते है कि चंद्रमा के प्रभाव से ही समुद्र में ज्वार और भाटा आता है,सिर्फ और सिर्फ चन्द्र ग्रह के गुरुत्वाकर्षण बल से ही ये सब होता है ,तो सोचिये जब चंद्र बल से महासागर जैसा विपुल जल भंडार प्रभावित हो सकता है तो मानव क्योँ नही, इन्सान के शरीर में भी जल सबसे ज्यादा मात्रा में पाया जाता है ।
चंद्र ग्रह इन्सान के शरीर में व्याप्त जल तत्व को भी उसी तरह से प्रभावित करता है जैसे की समुद्र के जल को, जब-जब चंद्र बल बढता है तब-तब मानसिक रोगी कुछ ज्यादा ही उद्वेलित होते है ।
अब हमने जान लिया है कि चंद्र ग्रह के कारण ही मन और मस्तिष्क में विकार उतपन्न होता है, मानसिक रोगों से छुटकारा पाने के लिए हमें चंद्र ग्रह से सम्बन्धित जल तत्व का अपने शरीर में संतुलन बनाना आवश्यक हो जाता है। अतः पानी प्रयाप्त तथा संतुलित पीए।
इसके अलावा प्राकृतिक स्थानों पर ज्यादा से ज्यादा भ्रमण करे ।
रात्रि में खुले स्थान से चंद्र दर्शन अधिक से अधिक करे ।
अपनी माँ का आशीर्वाद जरूर लें ।
बहते हुए जल,तालाब ,नदी के किनारे सुबह-शाम सैर करें ।
इसके अलावा सायंकाल में नजदीकी पार्क में जरूर टहले ।
छोटे-छोटे बच्चों के साथ समय बिताने पर भी मानसिक रोगों से शान्ति मिलती है ।

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