हंस योग- पञ्चमहापुरष योगों में देवगुरु वृहस्पति द्वारा निर्मित हंस नामक महापुरूष योग भी अत्यन्त शुभ परिणाम देने वाला योग है।
जब किसी व्यक्ति की कुण्डली में लग्न से केन्द्र स्थानों में, धनु, मीन, व कर्क राशि में वृहस्पतिदेव बैठे हो तब यह योग घटित होता है।
जो व्यक्ति हंस यग में उत्पन्न हो उसके हाथ और पैरो में शंख, कमल, मत्स्य, और अंकुर, के चिन्ह होते है। उसका शरीर दिखने में बहुत सुन्दर, सौम्य और तेज लिए हुए होता है। ऐसे व्यक्ति को आजीवन उत्तम ,स्वादिष्ट और विविध व्यञ्जनो की प्राप्ति होती रहती है। हंस योग में उत्पन्न जातक अतुल तेजस्वी तथा ज्ञानी होता है। यह लोग कट्टर धार्मिक होते है।
अगर इनके कार्य क्षेत्र की बात करें तो हंस योग वाले जातक शिक्षण संस्थानों में बहुतायात मात्रा में मिल जाएंगे।
हंस योग वाले जातक बहुत अच्छे काउसंलर होते है तथा समाज में इन्हें बहुत ख्याति प्राप्त होती है।इसके अलावा धर्मस्थलों में ये उच्चाधिकारी पद पर विभूषित होते है।
प्रशासनिक सेवाओं में इनकी सफल होने की सम्भावना बहुत अधिक रहती है

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