भद्र योग- यह योग बुद्धि और वाणी के कारकत्व वाले ग्रह बुध से निर्मित होता है, जब किसी व्यक्ति की कुण्डली में लग्न से केन्द्र में मिथुन या कन्या राशि का बुध बैठा हो तो तब यह योग घटित होता है।
जो व्यक्ति भद्र योग में जन्म लेता है , वह अत्यन्त कुशाग्र बुद्धि का होता है, शरीर से अत्यन्त सुन्दर तथा व्यवस्थित होता है, पहनावा भी इनका आकर्षक तथा सुसज्जित होता है, रहन-सहन में भी इनके भद्रता स्पष्ट रूप से झलकती है, भद्र योग में जन्में व्यक्ति का विद्वान अथवा प्रतिष्ठित लोग भी सम्मान करते है, इन लोगों के अन्दर प्रखर वक्ता बनने के सभी गुण विद्यमान होते है अथवा यूं कहें कि अधिकांश प्रखर वक्ता भद्र योग में जन्में होते है। भद्र योग में जिनका जन्म होता है वह लोग अत्यन्त वैभवशाली होते है, इनके कार्यक्षेत्र की अगर बात करे तो यह लोग व्यापार करना अधिक पसन्द करते है, तथा व्यापार में इन्हें सफलता भी खूब मिलती है, इसके अलावा किसी भी वाणी के कार्यों में इन्हें देखा जा सकता है, भद्रयोग वाले जातक बैंकिग के क्षेत्रों में भी सफल होते है।

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