प्रथम भाव-
यदि मेष का सूर्य लग्न शरीर के स्थान में ,उच्च का होकर बैठा हो तो, शारीरिक रूप से काफी प्रभावशाली रहेगा,कद काठी भी एक आकर्षण हुए होगी,बुद्धि में थोडी उग्रता जरूर होगी,वाणी में प्रभाव रहेगा तथा मन में स्वाभिमान भी कुछ ज्यादा ही होगा,परन्तु सूर्य की सातवीं नीच दृष्टि स्त्री एवं व्यापार भाव भाव पर होगी,जिस कारण स्त्री पक्ष के साथ मन मुटाव और साझेदारी के व्यापार में कुछ परेशानी जरूर होगी।
द्वितीय भाव-
दूसरे धन एवं कुटुम्ब स्थान में ,शत्रु शुक्र की राशि में बैठा है तो, धन स्थान में होने के कारण ये स्थान कुछ बन्धन सा कार्य भी करता है,विद्या ग्रहण में कुछ परेशानी रहेगी,वाणी में भी तीखापन सा प्रतीत होगा,जातक अपना धन अधिकतर दिखावे में खर्च करेगा,धन सञ्चय में भी रुकावटें आएगी, आयु एवं शोध के स्थान को मित्र मंगल की राशि को सातवीं दृष्टि से देखने पर उस भाव सम्बन्धित सुखद परिणाम देखने को मिलेंगे ।
तृतीय भाव-
तीसरे भाई एवं पराक्रम स्थान में,मित्र बुध की राशि में बैठने पर,विद्या बुद्धि के मामलो अच्छा एवं सुखद परिणाम देखने को मिलेगा, तीसरे पराक्रम स्थान में क्रूर ग्रह बहुत शक्तिशाली हो जाते हे जिसके कारण व्यक्ति अत्यधिक परिश्रमी हो जाता है,सातवीं मित्र दृष्टि से भाग्य स्थान को गुरू की राशि को देखने पर भाग्य में वृद्धि कराएगा ।
चतुर्थ भाव-
चतुर्थ भाव केन्द्र भाव माना जाता है,इस भाव से माता एवं सुख सुविधाओं का विचार किया जाता है,चतुर्थ स्थित सूर्य मित्र राशि का होगा,इस भाव में बैठने पर सन्तान की रफ से सुख की प्राप्ति होगी, बुद्धि भी तीक्ष्ण रहेगी, अपनी बुद्धि की योग्यता से भूमि मकानादि का सुख भोगने वाला होगा, सातवीं शत्रु दृष्टि से पिता एवं राज्य स्थान को देखने पर पिता के सम्बन्ध में कुछ निरसता अनुभव कराएगा, सरकारी कार्यों में भी कुछ व्यवधान देखने को मिलेगा।
पञ्चम भाव-
पञ्चम भाव त्रिकोण में स्वराशि का सूर्य हो तो पढाई के क्षेत्र में सफलता के कीर्तिमान स्थापित करेगा,उच्च शिक्षा भी बिना किसी रूकावट के पूरी होगी, वाणी और बुद्धि में काफी प्रभाव रहेगा,सन्तान पक्ष में परिणाम वाञ्छित और सुखद होंगे, सातवीं शत्रु दृष्टि से लाभ भाव को शनि की कुम्भ राशि में देख रहा है,आमदनी तो अच्छी होगी परन्तु लाभ प्राप्ति में असन्तुष्टि का भाव भी निरन्तर बना रहेगा।
छठें भाव-
छठें रोग, रिपु, ऋण के स्थान पर मित्र बुध की राशि पर बैठा है तो, विद्या ग्रहण करने में कुछ परेशानी रहेगी परन्तु बुद्धि के प्रभाव से शत्रुओं के बीच बडा भारी प्रभाव प्राप्त करेगा, सन्तान पक्ष के अन्दर भी कुछ परेशानी रहेगी,छठें भाव में क्रूर ग्रह बडा शक्तिशाली हो जाता है, इसलिए शत्रु पक्ष में भी प्रभाव बना रहेगा, सातवीं मित्र दृष्टि से व्यय भाव को देखने पर खर्चा खूब करेगा परन्तु दूर दराज के क्षेत्रों से लाभ की प्राप्ति भी करेगा ,
विदेश गमन से वाञ्छनीय लाभ प्राप्त होगा।

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