• मेष लग्न के बारहों भाव में सूर्य का फल भाग2


    सप्तम भाव में सूर्य-

                               सातवें केन्द्र, स्त्री, एवं रोजगार के स्थान पर नीच राधिका होकर शत्रु शुक्र की राशि में बैठा है इसलिए, विद्या ग्रहण में कमजोरी रहेगी, तथा बुद्धि और विवेक की कमी रहेगी, तथा स्त्री सुख भी न्यूनता के साथ प्राप्त होगा, रोजगार विशेषकर व्यापार के क्षेत्र में परेशानियां आएगी, तथा सातवीं उच्च दृष्टि से लग्न स्थान को देखने से शारीरिक क्षमता विशेष रूप से अच्छी रहेगी,तथा मन ही मन में एक स्वाभिमान निरन्तर रूप से बना रहेगा,

    अष्टम भाव में सूर्य-
                              आठवें मृत्यु आयु और अनुसन्धान,के स्थान में, मित्र मंगल की वृश्चिक राशि पर बैठा हो तो, शिक्षा ग्रहण में परेशानियां, सन्तान पक्ष में भी परेशानियां बनी रहेगी, तथा दिन चर्या भी प्राय सन्तुलित रहेगी, अनुसन्धान कार्यों से ख्याति प्राप्त हो सकती है, सातवीं दृष्टि से धन कुटुंब स्थान को ,शुक्र की वृषण राशि को देखने से धन के कोष में वृद्धि कराने में बडी भारी परेशानियां आएगी,इसके अलावा कुटुंब सुख में भी कुछ असन्तुष्ट बनी रहेगी।

    नवम भाव में सूर्य-
                            नवम त्रिकोण,भाग्य एवं धर्म-स्थान में मित्र गुरू की राशि पर बैठा है तो शिक्षा उत्तम और प्रभावी रहेगी,धर्म शास्त्र का का अच्छा ज्ञाता बनाएगा, भाग्य में भी निरन्तर वृद्धि के संकेत दिखाई देंगे, सन्तान का उत्तम सुख,सन्ता के माध्यम से भाग्योदय भी सम्भव है,वाणी में भी बड़ा भारी प्रभाव बना रहेगा,ईश्वर और न्याय पर विश्वास मानेगा, सातवीं मित्र दृष्टि से भाई-बहिन और पराक्रम भाव पर दृष्टि से जातक बडा भारी पराक्रमी होगा , अपने पराक्रम से अपना भाग्य लिखेगा।

    दशम भाव में सूर्य-
                             दशम भाव केन्द्र, पिता एवं राज्य-स्थान का होता है, यहाँ मकर राशि में स्थित सूर्य के कारण शिक्षा के कारण कर्म क्षेत्र में अच्छी खासी सफलता प्राप्त होगी,पिता के साथ कुछ वैमनस्यता वाली स्तिथि हमेशा बनी रहेगी,जातक थोडा क्रोधित होने वाला भी होगा,सन्तान पक्ष के साथ भी आत्मीयता की कमी अनुभव करेगा, सातवीं मित्र दृष्टि से माता, भूमि वाहन के भाव को देखने पर माता और भूमि का अच्छा  योग पाएगा,राज समाज व कारोबार के मार्ग में निरन्तर वृद्धि के और ले जाएगा।

    एकादश भाव में सूर्य-
                                  ग्यारहवें लाभ स्थान में शत्रु शनि की राशि में है तो, सर्वांगीण लाभ का मार्ग प्रशस्त कराएगा, ग्यारहवें भाव में पाप ग्रह काफी शक्तिशाली हो जाते है, इसलिए आमदनी के मार्ग में विशेष उन्नति के लिए जातक निरन्तर अथक परिश्रम करेगा, यहाँ स्थित सूर्य के कारण बुद्धि हमेशा सकारात्मक और सही दिशा में काम करेगी,सातवीं दृष्टि से विद्या स्थान को, स्वयं की राशि में देख रहा है इसलिए विद्या-बुद्धि की शक्ति प्राप्त करेगा, और सन्तान का सुख भी उत्तम रहेगा, इसके अलावा वाणी में कटुता रहेगा ,खुला मिलाकर यहाँ बेठा सूर्य जीवन के हर क्षेत्र में लाभ की स्तिथि को इंगित करता है।

    द्वादश भाव में सूर्य-
                              बारहवें व्यय एवं बाहरी स्थान में मित्र गुरू की राशि में बैठा है तो, खर्च की विशेष संचालन शक्ति ,बुद्धि योग द्वारा करेगा,जिससे व्यर्थ खर्चों में कमी रहेगी, और विदेशों से सम्बन्ध में भी मधुरता और लाभ की स्तिथि बनाएगा,किन्तु व्यय स्थान में बैठने से शिक्षा प्राप्ति में कुछ अडचने हो सकती है, सन्तान पक्ष में भी कुछ कमजोरी और परेशानी रहेगी, सातवीं मित्र दृष्टि से बुध की कन्या राशि में देख रहा है इसलिए शत्रु पक्ष में बडा बारी प्रभाव रहेगा और शत्रुओं से लाभ प्राप्ति के योग बनेंगे

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