जब भी किसी इंसान की साढ़ेसाती चलती है तो व्यक्ति परेशान रहना लग जाता है और समय ऐसा लगता है जैसे की बहुत धीरे धीरे निकल रहा है, इंसान को लगता है जैसे की ये दुख कभी खत्म नहीं होने वाला है, साढ़ेसाती का समय जीवन में ऐसा आता है कि जैसे गंदे कपड़े को धो पोंछ के निचोड़ा जाता है, वैसे ही इंसान को तरह तरह के कष्ट झेलते हुए समझ आता है की दुनिया आख़िर क्या है, साढ़ेसाती में इंसान को पता चलता है कि अपने पराए क्या है, कुलमिलाकर साढ़ेसाती जीवन में आने से इंसान सही रास्ते पर चलना सीखता है ।
साढ़ेसाती में क्या करें कि जीवन के संघर्ष कम हो और जीवन सुगम और सरल रहे ।
सर्वप्रथम तो हमेशा अपने कर्म सही रखें क्योंकि शनि महाराज कर्मफल दाता माने जाते है इसलिए कर्म अगर अच्छे रहेंगे तो साढ़ेसाती कब आई कब गई पता ही नहीं चलेगा ।
मास मदिरा के सेवन से साढ़ेसाती का समय और भी दुष्कर हो जाता है अतः मास मदिरा के सेवन से हमेसा दूरी बनाये रखें अन्यथा साढ़ेसाती और भी कष्टकारी होगी ।
अपने से निम्न वर्गीय लोगों की हमेसा आर्थिक और अन्य तरीकों से मदद करने से शनि देव प्रसन्न होते और साढ़ेसाती का दौर सामान्य निकल जाता है ।
जरूरतमंद को काले जूते दान करे,
पीपल के वृक्ष लगाएं और पीपल की सेवा करे ।
काले कुत्तों को खाना खियाए ।
सरसों तेल का दीपक सायंकाल में किसी शनि मंदिर या पीपल के वृक्ष के नीचे जलाए ।
तेल में अपना चेहरा देखकर उस तेल का दान करे अर्थात् छाया दान करे ।
काली चीजों को दान करे जैसे काले तिल, उड़द, काला छाता आदि ।
लोहे का सामान देवस्थान या किसी जरुरतमंद को दान करे ।
दशरथ कृत शनि स्तोत्र का नियमित पाठ करने शनि अत्यंत शुभ हो जाते है ।
शनि ग्रह के बीजमंत्रों का भी नियमित जाप करने से शनिदेव प्रसन्न हो जाते है ।
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