साढ़ेसाती को लेकर लोगों के मन बड़ा डर बैठा हुआ की साढ़ेसाती में क्या होगा कैसे होगा ।
सबसे पहले जानते है की जीवन में साढ़ेसाती कब और कैसे आती है, जब भी आपकी राशि के द्वादश भाव में शनि आए तो साढ़ेसाती प्रारंभ हो जाती है,शनि आपके द्वादश भाव में पूरे ढाई वर्ष तक रहेंगे जो की साढ़ेसाती की पहली ढैया होगी, उसके बाद शनि आपकी राशि में आ जाएँगे पुनः शनि यहाँ पर भी पूरे ढाई साल रहेंगे, उसके बाद शनि आपकी राशि से दूसरे भाव में आयेंगे यहा पर भी शनि पूरे ढाई साल विराजमान रहेंगे इस तरह तीन ढैय्या जब होंगी तो पूरे साढ़े सात साल हो जाएँगे जिसे ज्योतिषीय भाषा में साढ़ेसाती कहते है, साढ़ेसाती यानी की साढ़े सात साल शनि ग्रह आपको प्रभावित करेंगे तो जानते है तीनों ढैया का जीवन पर क्या प्रभाव रहेगा ।
प्रथम ढैया यानि की शनि आपकी राशि से बारहवें भाव में रहेंगे जो मानसिक तनाव और अत्यधिक खर्चों से व्यक्ति को परेशान रखता है, पहली ढैया के अंतर्गत शनि की तीसरी दृष्टि आपके दूसरे भाव पर पड़ने से आपकी बचत में सेंध लग जाती है,दूसरा भाव कुटुंब का भी होता है कुटुंभ में विवाद होने से भी व्यक्ति अत्यधिक मानसिक तनाव से गुजरता है ।
शनि की सातवी दृष्टि आपके छठे भाव में होने से शत्रुओं से पीड़ा रोग ऋण से वृद्धि होने से मन व्यथित हो जाता है ।
दसवी दृष्टि भाग्य नवम भाव पर पड़ने से भाग्य का साथ धीमा पड़ जाना और भाग्यवश कार्यों में रुकावटे पड़ती रहती है जिससे से समय पर कोई भी कार्य पूर्ण नहीं हो पाता है ।
दूसरी ढैय्या में शनि आपके राशि स्थान में विराजमान होंगे तो शरीर में पीड़ा, शरीर अनायास ही थका रहने लग जाता है, सिरदर्द की समस्या निरंतर रूप से बनी रहती है, इसके अलावा अत्यधिक मानसिक तनाव देखने को मिलता है ।
शनि की तीसरी दृष्टि आपकेपारक्रम भाव में पड़ने से शरीर में आलस्य भर जाना, काम करने का मन होना और टालने की प्रवृत्ति बढ़ जाती है ।
सातवी दृष्टि सप्तम भाव में पड़ने से पार्टनर के साथ तनाव की स्थिति बन जाने से आपसी रिस्ता और विश्वास ख़राब हो जाता है ।
दसवी दृष्टि कर्म दशम भाव में पड़ने से कारोबार नौकरी में बार बार बाधा पड़ जाना, नौकरी ब्यवसाय में अस्थिरता आ जाने से मानसिक व शारीरिक कष्ट महसूस होता है ।
शनि की तीसरी ढैया कुछ राहत लेकर आती है,तीसरी ढैया में शनि राशि स्थान से दूसरे होने से बचत करने में सहयोग देता है
तीसरी दृष्टि चतुर्थ भाव में पड़ने से व्यक्ति मातृभूमि से दूर हो जाता है
सातवी दृष्टि नवम भाव पर पड़ने से भाग्य का सहयोग कम मिल पाता है ।
दसवी दृष्टि ग्यारहवें भाव में पड़ने से कुछ बची हुई इच्छाये पूरी होती है जिससे मन प्रसन्न हो जाता है ।
कुलमिलाकर इसे उतरती हुई षढ़ेसती कहते है जो कुछ राहत के साथ जीवन ने सुकून का अनुभव करती है ।
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