काल सर्प दोष -
कुण्डली में कालसर्प दोष के फल क्या होते हैं। तो आइए जानते है की काल सर्प दोष कुण्डली में कैसे बनता है, जब कुण्डली में राहु और केतु के बीच में एक तरफ सभी ग्रह हो और एक तरफ के सभी भाव खाली हो तो कालसर्प दोष का निर्माण होता है। उदाहरणार्थ प्रथम भाव में राह हो और सप्तम भाव में केतु हो और बाकी अन्य सभी ग्रह 1 से लेकर सप्तम भाव अधवा सप्तम से लेकर बारहवें हो तो कालसर्प दोष का निर्माण हो जाता है।
कालसर्प के दुष्परिणाम -
अगर किसी व्यक्ति की कुण्डली में कालसर्प दोष होगा तो उसके जीवन ५०%. पतिशत पहलुओं में परिणाम नकारात्मक रहेंगे यानि जीवन में कुछ पहलुओं में नियमित रूप से संघर्ष जारी रहेगा। जैसे कि किसी जातक के प्रथम प्रथम भाव और सप्तम में राहु और केतु बैठे हुये और प्रथम सप्तम से कालसर्प दोष बन रहा हो ,और प्रथम भाव से लेकर सप्तम भाव तक सभी ग्रह बैठे है, और आठवें भाव से लेकर बारहवें भाव तक कोई भी ग्रह मौजूद नहीं होगा। ऐसे में आठवे से बारहवे भाव सम्वन्धित परिणामों में कमी के साथ संघर्ष रहेगा। उन सम्वन्धित भावों में जातक को निरन्तर संर्घषों के साथ परेशानियां झेलनी पड़ती और जातक निरन्तर रूप से कष्टों में रहता है।
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