सिंह लग्न में यदि वृषभ का सूर्य दशम पर बैठा है तो पिता स्थान में कुछ वैमनस्यता युक्त शक्ति को प्राप्त करेगा तथा राज-समाज में मान और प्रभाव प्राप्त करेगा। किन्तु उन्नति के मार्गों में कुछ नीरसता का अनुभव करेगा, परन्तु उन्नति के मार्ग में हमेशा प्रयत्नशील रहेगा और करने के लिये विशेष देह में प्रभाव शक्ति प्राप्त करेगा तथा सातवीं मित्र दृष्टि से मातृ-स्थान को मंगल की वृश्चिक राशि में देख रहा है, इसलिये माता के स्थान में सुन्दर रूचि रखेगा और सुख के साधनों को प्राप्त कार्य करेगा।
सिंह लग्न में यदि मिथुन का सूर्य ग्यारहवें लाभ-स्थान में मित्र बुध की राशि पर बैठा है तो देह की शक्ति के द्वारा विशेष लाभ प्राप्त करेगा और देह में विशेष शक्ति प्राप्त करेगा तथा क्रूर ग्रह यानी गरम ग्रह ग्यारहवें स्थान पर बलवान् हो जाता है, इसलिये आमदनी के मार्ग में विशेष सफलता प्राप्त करेगा और सदैव हर कार्यों में अपने निजी लाभ और स्वार्थ का विशेष ध्यान रखेगा तथा सातवीं मित्र दृष्टि से संतान स्थान को गुरु की धनु राशि में देख रहा है, इसलिये संतान की शक्ति प्राप्त करेगा तथा विद्या ग्रहण करेगा और हमेशा स्वार्थ युक्त बातें करेगा तथा वाणी में कुछ गर्मी रखेगा।
सिंह लग्न में यदि कर्क का सूर्य- बारहवें खर्च स्थान में मित्र चन्द्रमा की राशि पर बैठा है तो खर्चा विशेष करेगा तथा देह में कमजोरी और दुबलापन प्राप्त करेगा तथा बाहरी स्थानों में भ्रमण करेगा तथा हृदय में अशांति अनुभव करेगा और दूसरे स्थानों में शक्ति और स्वाभिमान प्राप्त करेगा तथा खर्च के मार्ग में प्रभाव रखेगा और सातवीं शत्रु दृष्टि से शत्रु स्थान को शनि की मकर राशि में देख रहा है, इसलिये शत्रु पक्ष में प्रभाव रखेगा तथा खर्च की शक्ति से एवं देह की शक्ति से अनेक प्रकार की दिक्कतों पर विजय प्राप्त करेगा।
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