कन्या लग्न में सूर्य
यदि कन्या का सूर्य- प्रथम केन्द्र देह के स्थान पर मित्र बुध की राशि पर बैठा है तो खर्चा अधिक शानदार रहेगा और बाहरी स्थानों का सुन्दर सम्बन्ध प्राप्त होगा तथा व्ययेश होने के दोष के कारण से देह में दुर्बलता प्राप्त रहेगी और बाहरी स्थानों में आने जाने से प्रभाव बर्धन होगा और खर्च के कारण कुछ रेडनी अनुभव होगी तथा सातवीं मित्र दृष्टि से स्त्री स्थान को गुरु की मीन राशि में देख रहा है, इसलिये व्ययेश होने के कारण स्त्री स्थान में कुछ कमजोरी या परेशानी मिलेगी और रोजगार के मार्ग की कुछ हानि तथा कुछ कमी रहेगी।
कन्या लग्न में यदि तुला का सूर्य- धन स्थान में नीच का होकर शत्रु शुक्र राशि पर बैठा है तो धन के कोष स्थान में भारी कमी और कष्ट के कारण प्राप्त करेगा, सूर्य को व्ययेश होने का दोष और नीच होने का दोष है अर्थात् प्रबल दोष है, इसलिये जन और धन की हानि प्राप्त होगी तथा धन की शक्ति के लिये बाहरी स्थान का कमजोर सम्बन्ध प्राप्त करेगा और खर्च करने के स्थान में कमजोरी और कष्ट प्राप्त करेगा तथा सातवीं उच्च दृष्टि से आयु स्थान को मंगल की मेष राशि में देख रहा है, इसलिये जीवन में प्रभाव और पुरातत्व शक्ति प्राप्त करेगा।
कन्या लग्न में यदि वृश्चिक का सूर्य- तीसरे भाई के स्थान में मित्र मंगल की राशि पर बैठा है तो पराक्रम की शक्ति से खर्च का सुन्दर संचालन करेगा और बाहरी स्थानों का अच्छा सम्बन्ध रखेगा। किन्तु व्ययेश होने के दोष कारण से भाई-बहन के संबन्धों में कमजोरी प्राप्त करेगी और दैहिक पुरुषार्थ के स्थान में कुछ कमजोरी महसूस करेगा तथा तीसरे स्थान पर गरम ग्रह बलवान् हो जाता है, इसलिये पुरुषार्थ शक्ति के सम्बन्ध में तथा खर्च के सम्बन्ध में बडी भारी हिम्मत और प्रभाव शक्ति की प्राप्ति होगी और सातवीं शत्रु दृष्टि से भाग्य स्थान को शुक्र की वृषभ राशि में देख रहा है, इसलिये भाग्य का साथ कुछ कम ही रहेगा ।
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