सिंह लग्न में सूर्य बैठा है तो स्त्री पक्ष में कछ वैमनस्यता युक्त शक्ति का सम्बन्ध प्राप्त करेगा और रोजगार के पक्ष में कठिन परिश्रम से सफलता प्राप्त करेगा। को तथा गृहस्थ के संचालन में नीरसता का अनुभव करेगा, किन्तु फिर भी ग्रहस्थिक मार्ग के भोगादिक पक्ष में आत्मीयता रखेगा और सातवीं दृष्टि से स्वयं अपनी सिंह राशि में देह स्थान को स्वक्षेत्र रूप में देख रहा है, इसलिये देह में शक्ति और स्वाभिमान रखेगा तथा गृहस्थ धर्म के संचालन मार्ग से कुछ ऊँचा नाम करने की कोशिश करेगा।
सिंह लग्न में यदि मीन का सूर्य- आठवें मृत्यु स्थान पर मित्र गुरु की राशि पर बैठा है तो देह के स्थान में कुछ परेशानी का योग प्राप्त करेगा तथा बाहरी दसरे स्थान का सम्बन्ध प्राप्त करेगा और जीवन निर्वाह की शक्ति को तथा कुछ पुरातत्व सम्बन्ध को स्वयं अपनी दैहिक शक्ति के योग से प्राप्त करेगा और अपने जीवन की दिनचर्या में प्रभाव प्राप्त करेगा और सातवीं मित्र दृष्टि से धन स्थान को बुध की कन्या राशि में देख रहा है, इसलिये धन की वृद्धि करने के लिये बड़ा प्रयत्न करेगा और धन-जन के मार्ग में कुछ सफलता प्राप्त करेगा तथा क्रोधी बनेगा।
सिंह लग्न में यदि मेष का सूर्य- भाग्य स्थान में उच्च का होकर मित्र मंगल की राशि पर बैठा है तो भाग्य ३ की बड़ी शक्ति प्राप्त करेगा और देह में बड़ी भारी प्रभाव शक्ति प्राप्त करेगा तथा धर्म और ईश्वर में विश्वास करेगा और भाग्यवान् समझा जायेगा तथा देह में स्थूलता प्राप्त करेगा। सातवीं नीच दृष्टि से भाई के स्थान को शत्रु शुक्र की तुला राशि में देख रहा है, इसलिये भाई-बहिन का सम्बन्ध असंतोष रूप में प्राप्त करेगा और पराक्रम स्थान में लापरवाही करेगा तथा पुरुषार्थ की तुलना में भाग्य को बड़ा मानेगा और कभी-कभी किसी छोटे कार्य को करेगा।
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