सिंह लग्न में यदि वृश्चिक का सूर्य-चौथे केन्द्र माता के स्थान पर मित्र मंगल की राशि पर बैठा है तो माता की सुख शक्ति प्राप्त करेगा और सुख का साधन प्राप्त करेगा और देह को आनन्द युक्त एवं प्रभाव युक्त रखेगा तथा सातवीं शत्रु दृष्टि से पिता स्थान को शुक्र की वृषभ राशि में देख रहा है, इसलिये पिता स्थान के सम्बन्धों में वैमनस्यता या मतभेद रखेगा तथा राजसमाज के स्थान में कुछ प्रभाव प्राप्त करेगा और किसी बड़े कारोबार में सफलता प्राप्त होगी ।
सिंह लग्न में यदि धनु का सूर्य- पाँचवें त्रिकोण संतान स्थान पर मित्र गुरु की राशि पर बैठा है तो संतान शक्ति प्राप्त करेगा तथा उत्तम विद्या प्राप्त करेगा और बुद्धि के अन्दर दूरदर्शिता और आत्मज्ञान की शक्ति प्राप्त करेगा तथा देह और बुद्धि योग के द्वारा प्रभाव प्राप्त करेगा। किन्तु दिमाग के अन्दर तेजी रखेगा और सातवीं मित्र दृष्टि से लाभस्थान को बुध की मिथुन राशि में देख रहा है, इसलिये बुद्धि योग के द्वारा खूब लाभ प्राप्त करेगा द्वारा आमदनी के मार्ग में वृद्धि प्राप्त करेगा तथा समाज में खूब प्रतिष्ठा प्राप्त होगी ।
सिंह लग्न में यदि मकर का सूर्य - छठें शत्रु स्थान पर शनि की मकर राशि पर बैठा है तो देह के पक्ष में कुछ परेशानी तथा कुछ परतंत्रता एवं कुछ रोग प्राप्त करेगा तथा सुन्दरता में कुछ कमी प्राप्त करेगा। किन्तु छठें स्थान पर क्रूर ग्रह बलवान् हो जाता है, इसलिये शत्रुओं की और दिक्कतों की परवाह नहीं करेगा तथा हिम्मत शक्ति के द्वारा शत्रु पक्ष में विजय प्राप्त करेगा और अपने को कुछ घिराव के अन्दर समझते हुए भी प्रभाव शक्ति से काम लेगा और सातवीं मित्र दृष्टि से खर्च स्थान को चन्द्रमा की कर्क राशि में देख रहा है. इसलिये खर्चा खूब करेगा तथा बाहरी स्थानों का अच्छा सम्बन्ध प्राप्त करेगा।
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