जन्म से पांचवे महीने तक दान्त निकलने का फल सामान्यतः अशुभ ही माना जाता है,यदि अशुभ मास में दन्तोत्पत्ति हो तो महामृत्युंजय जप, ग्रह शान्ति, दान आदि से अशुभत्व निवारण कर लेना चाहिए, जिससे अरिष्ट निवारण हो जाता है,हमारे संस्कारों में हर एक घटनाओं में वैज्ञानिकता कही न कही छिपी रहती है, सो दाँत कब निकले उसके पीछे भी एक बहुत बड़ा फल छिपा रहता है तो आइए जानते कब दाँत निकलने से क्या परिणाम प्राप्त होते है ।
मास फल-
१ मास में स्वयं को कष्ट
२ भ्रातृ कष्ट
३ बहिन को कष्ट
४ मातृ कष्ट
५ बडे भाई को कष्ट
६ सुख
७ पिता से सुख
८ देहसुख
९ धन प्राप्ति
१० सौख्य प्रा्पति
११ अतिसौख्य
१२ विपुल धन।।
इसके अतिरिक्त १२ महीनों के बाद दान्त आना भी शुभ नहीं माना जाता है, तेरहवें महीने या उसके बाद दान्त आना अपने साथ कई सारी परेशानियाँ लेकर आता है,
उल्टे दान्त अर्थात नीचे से दान्त आना मामा पक्ष के लिए अशुभ होते है।।
ऐसे में मामा की तरफ़ से अरिष्ट निवारण के लिए भांजे व भांजी को चाँदी की कुल्हाड़ी देनी चाहिए जिससे मामा के साथ भांजों के रिश्ते मधुर बने रहे ।

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