भारतीय ज्योतिष में पाराशर होरा शास्त्र अनुसार निम्नलिखित 42 ग्रह दशाओं का उल्लेख है,
विंशोतरीदशा, षोडशोतरीदशा, द्वादशोत्तरी दशा, अष्टोत्तरी ,पञ्चोत्तरी, शतसमा, चतुरशीतिसमा, द्विसप्ततीसमा, षष्टिसमा, षड् विंशतिसमा, नवमाशनव, राश्य॔सक, कालदशा, कालचक्रदशा, चक्रदशा, चरपर्यायदशा, स्थिरदशा, उत्तर दशा, ब्रह्मग्रहदशा, केन्द्रादिदशा, कारकादि दशा, माडूकी दशा, शूल दशा, योगार्धदशा, दृग्दशा, त्रिकोणदशा, राशिदशा, तारादशा, वर्णद दशा, पञ्चस्वरदशा, योगिनी दशा, पिण्ड दशा, अंश दशा, नैसर्गिक दशा, अष्टवर्ग दशा, सन्ध्या दशा, और पाचक दशा, इस प्रकार की 42 दशा होती है
परन्तु वर्तमान में प्रमुखता से जो दशा विचारणीय और सटीकता लिए हुए है ,वह है विशोतरी दशा, आजकल अधिकांशतः ज्योतिषी विशोंतरी दशा को ही आधार मानकर परिणामों पर पहुंचते है, विंशोतरी दशा जन्म नक्षत्र के आधार पर तैयार होती है, इसके परिणाम भी काफी सटीकता लिए हुए होते है,
इसके अलावा वर्तमान में योगिनी दशाओं का भी प्रचलन अन्य दशाओं की अपेक्षा अधिक मात्रा में किया जाता है।

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