कन्या लग्न में यदि मिथुन का सूर्य-दसम केन्द्र स्थान मित्र बुध की राशि पर बैठा है तो प्रभाव शक्ति के द्वारा खर्च का संचालन कार्य करेगा तथा बाहर स्थानों का सुन्दर प्रभाव युक्त सम्बन्ध प्राप्त करेगा किन्तु व्ययेश होने के दोष के कारणों से पिता स्थान में हानि या कमी पायेगा और राज-समाज तथा कारबार की उन्नति के मार्ग में कुछ कमजोरी रहेगी और सातवीं मित्र दृष्टि से मातृ स्थान एवं सुख भवन को गुरु की धनु राशि में देख रहा है, इसलिये प्राप्त करेगा।
यदि कर्क का सूर्य- ग्यारहवें लाभ स्थान मे मित्र चन्द्र की कर्क राशि पर बैठा है तो आमदनी के मार्ग से खर्च का संचालन कार्य करेगा और सू. बाहरी स्थानों के सम्बन्ध से लाभ प्राप्त करेगा। किन्तु व्ययेश होने के दोष से लाभ के मार्ग में कुछ कमी प्रतीत होगी, परन्तु गरम ग्रह लाभस्थान में शक्तिशाली कार्य करता है, इसलिये खर्च के योग से आमदनी में वृद्धि प्राप्त करेगा और सातवीं शत्रु दृष्टि से विद्या एवं संतान स्थान को शनि की मकर राशि में देख रहा है, इसलिये संतान पक्ष में कुछ कष्ट पायेगा और विद्या बुद्धि में कुछ कमजोरी और फिकर प्राप्त करेगा।
कन्या लग्न में यदि सिंह का सूर्य- बारहवें खर्च स्थान में स्वयं अपनी राशि पर स्वक्षेत्री होकर बैठा है तो खर्चा विशेष करेगा तथा खर्च के मार्ग में प्रभाव शक्ति पायेगा और बाहरी स्थानों का मजबूत सम्बन्ध और प्रभाव प्राप्त करेगा तथा सातवीं शत्रु दृष्टि से शत्रु स्थान को शनि की कुम्भ राशि में देख रहा है, इसलिये शत्रु पक्ष में कुछ नाजायज खर्च करना पड़ेगा अर्थात् झगड़े-झंझट, रोगादिक में प्रभाव रखेगा. क्योंकि छठे स्थान पर गरम ग्रह की दृष्टि अच्छा फल देती पक्ष में कुछ खर्च करना पड़ेगा, किन्तु शत्रु पक्ष है, इसलिये मुसीबतों में साहस रखेगा।
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