कन्या लग्न में यदि मीन का सूर्य- सातवें केन्द्र स्त्री स्थान में मित्र गुरु की राशि पर बैठा है तो रोजगार के मार्ग से खर्च का संचालन कार्य करेगा और बाहरी स्थानों का सुन्दर सम्बन्ध बनावेगा। किन्तु व्ययेश होने के दोष कारणों से स्त्री स्थान में कुछ कमी तथा कुछ परेशानी प्राप्त करेगा और रोजगार के कुछ हानि तथा कुछ कमजोरी प्राप्त करेगा और गृहस्थ भोगादिक सुखों में कुछ त्रुटि रहेगी और सातवीं मित्र दृष्टि से देह के स्थान को बुध की कन्या राशि में देख रहा है, इसलिये देह में कुछ कमजोरी प्राप्त रहेगी और खर्च के कारणों से कुछ फिकर और चंचलता एवं क्रोध प्राप्त करेगा।
कन्या लग्न में यदि मेष का सूर्य- आठवें आयु स्थान में उच्च का होकर मित्र मंगल की राशि पर बैठा है तो खर्चा विशेष करेगा और बाहरी स्थानों का विशेष सम्बन्ध स्थापित करेगा और व्ययेश होने का दोष तथा उच्च होने की शक्ति; इन दोनों कारणों के योग से जीवन में कुछ परेशानी और कुछ प्रभाव शक्ति प्राप्त करेगा तथा प्रभाव की वृद्धि के लिये खर्चा अधिक स्वयमेव होगा और पुरातत्व की कुछ शक्ति पायेगा तथा सातवीं नीच दृष्टि से धन को शुक्र की तुला राशि में देख रहा है, इसलिये धन की विशेष हानि करेगा और कुटुम्ब में कमी व अशांति प्राप्त करेगा और धन की तरफ से चिंता फिकर प्राप्त करेगा।
कन्या लग्न में यदि वृषभ का सूर्य- नवम त्रिकोण भाग्य स्थान में शत्रु शुक्र की राशि पर बैठा है तो भाग्य की शक्ति के द्वारा खर्च का संचालन करेगा और बाहरी स्थानों का सुन्दर सम्बन्ध प्राप्त करेगा तथा व्ययेश होने के दोष के कारण भाग्य स्थान में कमजोरी एवं परेशानी प्राप्त करेगा और धर्म के सू. स्थान में कुछ हानि तथा कुछ कमी प्राप्त करेगा और ईश्वर के विश्वास में संदेह और भ्रम रहेगा और सातवीं मित्र दृष्टि से भाई के स्थान को मंगल की वृश्चिक राशि में देख रहा है, इसलिये भाई-बहिन के सुख में कुछ कमी रहेगी और पराक्रम के सम्बन्ध में कुछ कमजोरी रहेगी, किन्तु खर्च का प्रभाव रहेगा।
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