लग्न या चन्द्रमा से दशम में कौन सा ग्रह है। वह ग्रह अपने मार्ग से घन प्राप्ति करावेगा यह एक बात बतायी। अब दूसरी बात बताते हैं। यह देखिये कि लग्न, सूर्य और दशम इन तीनों में बलवान् कौन है । जो इन तीनों में अधिक बलवान् हो उससे दशम राशि कौनसी पड़ती है ? उस दशम राशि का स्वामी किस नवांश में है ? उस नवांश का स्वामी कौनसा ग्रह है ? जो ग्रह आवे उस ग्रह के गुण, स्वभाव, साधन से जातक को धन प्राप्ति होगी। उदाहरण के लिये एक कुण्डली दी जाती है। इसमें सिंह लग्न है, सूर्य वृश्चिक में है, और चन्द्रमा मीन में है। मान लीजिये ४ लग्न सबसे बलवान् है तो लग्न से ७५ दशम वृष राशि हुई। इसका स्वामी ३ शुक्र मान लीजिये तुला राशि में ५ अंश का है तो शुक्र वृश्चिक नवांश में २ हुआ क्योंकि तुला राशि के ३०-२०' से १ ६०-४०' तक वृश्चिक नवांश रहता है । वृश्चिक नवांश का स्वामी मंगल है। इस कारण मंगल के स्वभाव, गुण, साधन और वृत्ति द्वारा थन लाभ कहेंगे ।
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