• ज्येष्ठा नक्षत्र में जन्में लोग कैसे होते हैं-

    ज्येष्ठा नक्षत्र 


    जेष्ठा नक्षत्र मंगल ग्रह द्वारा शासित  वृश्चिक राशि में पडता राशि स्वामी मंगल जैसा ग्रह होने से ज्येष्ठा नक्षत्र पर मंगल जैसा प्रभाव सामान्य तौर पर बडी आसानी से देखा जाता है, इसके  अलावा इस नक्षत्र में जन्में जातकों का राक्षस गण होने से इनमें क्रूरता के भाव भी यदा कदा देखने को मिल जाते है।

    यदि आपका जन्म ज्येष्ठा नक्षत्र में हुआ है तो आप दृढ निश्चयी और मज़बूत व्यक्तित्व के स्वामी है. आप नियम से जीवन व्यतीत करना पसंद करते हैं. आपकी दिनचर्या सैनिकों की तरह अनुशासित और सुव्यवस्थित होती है. आप शारीरिक रूप से गठीले और मज़बूत होते हैं तथा कार्य करने में सैनिकों के समान फुर्तीले होते हैं. किसी के बारे में आपके विचार शीघ्र नहीं बदलते और दूसरों को आप हठी प्रतीत होतें है. आप एक बुद्धिमान और बौधिक विचारधारा पर चलने वाले व्यक्ति हैं. आप बुद्धिमान व्यक्तियों का सम्मान करते हैं और सदैव सच्चे लोगो के बीच रहना पसंद करते हैं.

    आप अपने हठीले स्वभाव के कारण जीवन में कई बार कठिनाईयों का सामना करते हैं. आप अपने विचारों पर इतना दृढ रहते हैं की आपको बदलते हुए समय और स्तिथियों के अनुसार ढालना बहुत कठिन कार्य है.  आप अपने साथ बहुत साजो सामान रखना पसंद नहीं करते जबकि ओरों को आप घमंडी प्रतीत होते है .  वास्तिविकता इसके बिलकुल उलट है आप ह्रदय से एकदम सच्चे और पवित्र होते है. आपकी सबसे बड़ी कमी है किसी भी राज़ को आप राज़ नहीं रहने देते, चाहे फिर वह आपका अपना हो या किसी और का. ज्येष्ठा नक्षत्र के जातकों को अक्सर शराब या नशीले पदार्थों का सेवन करते हुए देखा गया है क्योंकि आपमें स्तिथियों से निबटने की अंदरूनी ताकत नहीं होती है. दिखावे में आपका विश्वास नहीं है इसलिए आपके मित्र भी बहुत कम होते हैं.

    आप बहुत कम उम्र से ही कमाने लग जाते हैं और आजीवन किसी की मदद लेना पसंद नहीं करते हैं . करियर के कारण आप अपने घर से दूर रहते हैं और 18 से 26 वर्ष तक बहुत से व्यवसाय बदलते हुए आगे बड़ते हैं. अधिक बदलाव के कारण धन की कमी भी आपको अति है. 27 वर्ष के बाद कुछ स्थिरता आती है और आप अपनी मेहनत और लगन के कारण तरक्की पाते हैं.

    ज्येष्ठ नक्षत्र के जातक अपने जीवन साथी के कारण सुख और ख़ुशी का अनुभव करते हैं परन्तु पति/पत्नी के रोगी होने पर उनसे दूरी बनाना इनके लिए मजबूरी बन जाता है.

    प्रथम चरण  - 

    इस चरण का स्वामी बृहस्पति हैं. इस नक्षत्र में जन्मा जातक क्रूर होता है. बृहस्पति लग्नेश मंगल का शत्रु है तथा नक्षत्र स्वामी बुध का भी शत्रु है. अतः बुध या मंगल की दशा में बृहस्पति की अन्तर्दशा अशुभ फल देगी. बृहस्पति की अपनी दशा शुभ फलदायी होगी. मंगल की दशा अन्तर्दशा शुभ फलों से परिपूर्ण होगी.

    द्वितीय चरण  - 

    इस चरण का स्वामी बुध हैं. इस नक्षत्र में जन्मा जातक भोग और विलासितापूर्ण जीवन जीता है. . इस चरण का स्वामी बुध है तथा नक्षत्र स्वामी भी बुध होने के कारण बुध की दशा उत्तम फल देगी. बुध में मंगल का अंतर या मंगल में बुध का अंतर कष्टदायी होगा.

    तृतीय चरण  - 

    इस  चरण का स्वामी शनि हैं. इस नक्षत्र में जन्मा जातक विद्वान् व्यक्ति होगा. शनि लग्नेश मंगल का शत्रु है परन्तु बुध का मित्र है अतः शनि में बुध का अंतर या बुध में शनि का अंतर शुभ फल देगा. लग्नेश मंगल की दशा अन्तर्दशा शुभ फल देगी.

    चतुर्थ चरण -

     इस चरण का स्वामी शुक्र हैं. इस नक्षत्र में जन्मे जातक को पुत्र सुख अवश्य प्राप्त होता है. शुक्र लग्नेश मंगल का मित्र है परन्तु बुध का शत्रु अतः शुक्र की दशा मिश्रित फल देगी और बुध की दशा अत्यंत शुभ फल देगी. मंगल की दशा भी शुभ फलदायी होगी.

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