पूर्वाषाढा नक्षत्र-
पूर्वाषाढा नक्षत्र धनु राशि में होता है जिसका स्वामी गुरू है,पूर्वाषाढा में जन्में जातकों पर गुरू का सामान्य प्रभाव देखने को मिल जाता है,
पूर्वाषाढा में जन्म लेने वाला जातक थोडा नकचढ़ा और उग्र स्वभाव के होने बावजूद कोमल हृदयी और दूसरों से स्नेह रखने वाला होता है. आप जीवन में सकारत्मक विचारधारा से आगे बढ़ते हुए अपने लक्ष्य प्राप्त करते हैं. आपका व्यक्तित्व दूसरों पर हावी रहता है परन्तु आप एक संवेदनशील व्यक्ति हैं जो दूसरों की मदद के लिए सदैव तैयार रहतें है . अपने इन्ही गुणों के कारण आप को बहुत अधिक प्रेम व् सम्मान भी मिलता है परन्तु अपनी चंचल बुद्धि के कारण आप अधिक वफादार नहीं होते हैं और कभी कभी अनैतिक कार्यों में भी लिप्त हो जाते हैं. कुल मिलकर आप एक जटिल व्यक्ति हैं जिसे समझाना मुश्किल है. इस नक्षत्र में जन्मे जातक बुद्धिजीवी होते हैं और अपनी मेहनत और सत्यनिष्ठा के कारण आगे बढ़ते हैं. जीवन में कई बार जहाँ आपको असंभावित व्यक्तियों से मदद मिलती है वहीँ करीबी और मित्रों से धोखा.
आप बेहद हिम्मती व्यक्ति हैं परन्तु कभी कभी निर्णायक स्तिथि में पहुँचने के लिए किसी दूसरे का मार्गदर्शन आपके लिए आवश्यक हो जाता है. किसी निर्णय पर पहुंचकर आपको हिलाना संभव नहीं है इसी कारण आप कभी कभी जिद्दी भी समझे जाते हैं. आपको अपने कार्यों में किसी का हस्तक्षेप कतई पसंद नहीं है चाहे आप कितने भी गलत क्यों न हों.
यदि पूर्वाषाढा जातक व्यवसाय में हो तो अपने अधीनस्थ कर्मचारियों के चुनाव में अधिक सतर्क रहें क्योंकि उनकी सफलता इन्ही करमचारियों पर निर्भर करती है. वैसे आपके लिए मेडिकल, कला , दर्शन शास्त्र और विज्ञान से सम्बंधित क्षेत्र सर्वोत्तम हैं.
जीवन में पता पिता का सहयोग न के बराबर रहता है परन्तु भाई बहनों के प्रेम और सहयोग के कारण आप सफलता प्राप्त करते हैं. व्यवसायिक दाईत्व के कारण आपको अपने जन्म स्थल से दूर जाना पद सकता है.
आपका विवाह थोडा विलम्ब से होता है परन्तु एक अच्छे जीवन साथी के कारण आपका दांपत्य जीवन सुखमय एवं आनंददायक होता है. आपका अपनी पत्नी और ससुराल पक्ष से बेहद लगाव रहेगा. आपकी संतान बुद्धिमान एवं आपका नाम रोशन करने वाली होगी.
प्रथम चरण -
इस चरण का स्वामी सूर्य हैं. दोनों ग्रह परस्पर शत्रु होते हुए भी तेजस्वी हैं इसलिए इस चरण में जन्मा जातक अपनी जाती का तेजस्वी एवं श्रेष्ठ व्यक्ति होता है. गुरु की दशा शुभ फल देगी. सूर्य की दशा में जातक का सम्पूर्ण भाग्योदय होगा. शुक्र की दशा सामान्य जाएगी.
द्वितीय चरण -
इस चरण का स्वामी बुध हैं. गुरु एवं शुक्र दोनों आचार्य एवं बुद्धि प्रधान ग्रह हैं. परस्पर शत्रु होते हुए भी तेजस्वी हैं . बुध और शुक्र की मित्रता के कारण व्यक्ति राजा तुल्य पराक्रमी एवं बुद्धिशाली होगा. गुरु की दशा उत्तम फल देगी. सूर्य की दशा में जातक का सम्पूर्ण भाग्योदय होगा. बुध की दशा भी श्रेष्ठ फल देगी. शुक्र की दशा सामान्य जाएगी.
तृतीय चरण -
इस चरण का स्वामी शुक्र हैं. दोनों ग्रह गुरु और शुक्र परस्पर शत्रु होते हुए भी तेजस्वी हैं इसलिए इस चरण में जन्मा जातक प्रिय , मीठी एवं हितकर वाणी बोलेगा. गुरु की दशा शुभ फल देगी. शुक्र की दशा में जातक का सम्पूर्ण भाग्योदय होगा. शुक्र की दशा कभी भी अशुभ फल नहीं देगी.
चतुर्थ चरण -
इस चरण का स्वामी मंगल हैं. दोनों ग्रह गुरु और शुक्र परस्पर शत्रु हैं. मंगल से भी शुक्र की शत्रुता है इसलिए इस चरण में जन्मा जातक संघर्ष करता हुआ धनी होगा. गुरु की दशा शुभ फल देगी. सूर्य की दशा में जातक का सम्पूर्ण भाग्योदय होगा. मंगल की दशा विदेशों की यात्रा या तीर्थ कराएगी शुक्र की दशा सामान्य जाएगी.

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