यदि वृश्चिक राशि का सूर्य सप्तम भाव में हो तो स्त्री सुख मिलेगा, चतुर्थ का स्वामी होने के कारण माता का सुख भी अच्छा रहेगा, स्त्री के गृहस्थ में रहन सहन बहुत ही उम्दा रहेगा, मकानादि का सुख भी ठीक ठाक रहेगा, परन्तु क्रूर ग्रह होने के कारण कभी कभी पत्नि के साथ मन मुटाव वाली स्थिति भी उतपन्न हो सकती है,सातवीं शत्रु दृष्टि से शुक्र की वृषभ राशि को देखेगा जिसके कारण शरीर की सुन्दरता में कमी रहेगी,गृहस्थी सञ्चालन के कारण शरीर को आराम कम मिलेगा, और मन में एक अशान्ति व्याप्त रहेगी।
अष्टम भाव में सूर्य-
आठवें आयु स्थान में मित्र गुरू की धनु राशि में बैठा हो तो, माता के स्थान में हानि के योग बनेंगे, मातृभूमि से वियोग भी सम्भव होगा, जन्म स्थान,भूमि मकानादि के सुख में बडी कमी रहेगी,घरेलू वातावरण भी अधिकतर क्लेशयुक्त रहेगा,किन्तु सुखेश सूर्य अष्टम स्थान में होने से आयु का सुख और दैनिक चर्या का लाभ हमेशा बना रहेगा,सातवीं मित्र दृष्टि से कुटुम्ब स्थान को देखने पर धन की वृद्धि निरन्तर रूप से होती रहेगी।
नवम भाव में सूर्य-
नवें भाग्य स्थान में शत्रु शनि की मकर राशि में बैठा है तो,माता के सुख में यहाँ पर भी कुछ कमी करेगा, भूमि मकानादि का योग भी भाग्य वश ही हो पाएगा, घरेलू वातावरण भी सामान्य ही रहेगा, भाग्य भी कभी बहुत अच्छा तो कभी बहुत खराब रहेगा, धर्म का पालन भी जातक करेगा, किन्तु धर्म के मामले में ठीक तरह से व्याख्या नही कर पाएगा,सातवीं मित्र दृष्टि से कर्क राशि को देखने पर भाई बहिन का सुख अच्छा रहेगा तथा जातक पराक्रमी होगा।
सप्तम भाव में सूर्य-यदि वृश्चिक राशि का सूर्य सप्तम भाव
दशम भाव में सूर्य-
दसवें केन्द्र और पिता के स्थान पर शत्रु शनि की कुम्भ राशि में बैठा है तो,पिता के साथ सम्बन्धों में कडवाहट अथवा पिता का स्वास्थ्य खराब रहेगा, किन्तु शासन प्रशासन से यहाँ स्थित सूर्य बहुत सहयोग तथा सम्मान प्राप्त कराएगा , सरकारी क्षेत्रों में कार्य करने का अवसर मिलेगा, यहाँ स्थित सूर्य कर्म क्षेत्र में ख्याति प्रदान कराऐगा,सातवीं दृष्टि से स्वयं की सिंह राशि को देखने से मातृ पक्ष और भूमि वाहनादि का उत्तम सुख कराएगा।
एकादश भाव में सूर्य-
ग्यारहवें लाभ स्थान में मित्र गुरू की राशि मीन मे सूर्य बैठा है तो लाभ की उत्तम स्थिति बनी रहेगी, क्योकि ग्यारहवें भाव में क्रूर ग्रहों का फल अच्छा माना जाता है, राजकीय क्षेत्रों से भी जातक को यदा कदा लाभ मिलता रहेगा, सातवी मित्र दृष्टि से बुध की राशि को देखने पर विद्या एवं सन्तान को सुख भी उत्तम रहेगा, सन्तान से लाभ प्राप्ति के योग भी यहाँ स्थित सूर्य बनाएगा ।
बारहवें भाव में सूर्य-
अगर बारहवें भाव में अपनी उच्च राशि का सूर्य बैठा है तो खर्चों की अधिकता जीवन पर्यंत बनी रहेगी, व्यय भाव में सुखेश होने से माता भूमि वाहनादि के सुखों का ह्रास होता रहेगा,जन्म भूमि से जातक की हमेशा दूरी बनी रहेगी परन्तु प्रदेश में जातक को खूब सुख एवं मान सम्मान प्राप्त होगा, यहाँ स्थित सूर्य कि सातवीं दृष्टि शत्रु शुक्र की राशि में होने से यदा कदा छोटे-मोटे रोग जातक को परेशान करते रहेंगे ।

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