धनु लग्न में यदि मीन का सूर्य चौथे केन्द्र माता भूमि के स्थान में मित्र गुरु की राशि पर बैठा है माता के स्थान में बड़ा भारी प्रभाव तथा भूमि भवन वाहन का अच्छा सुख रहेगा और सुख मिलेगा तथा भूमि मकानादि की प्राप्त होगी और घरेलू वातावरण के अन्दर भाग्य शक्ति से बड़ा आनन्द और प्रभाव रहेगा और शक्ति से धर्म के पालन का आचरण रहेगा तथा सामने कन्या राशि में देख रहा है, इसलिये पिता स्थान से सफलता शक्ति पावेगा तथा सातवी मित्र दृष्टि से पिता एवं राज्य स्थान को बुध की राशि कन्या को देखेगा समाज में मान एवं प्रभाव रहेगा और कारबार के मार्ग में भाग्य की शक्ति रखेगी धर्म के सुन्दर मार्ग का अनुसरण रहने के कारण यश प्राप्त रहेगा
धन लग्न में यदि मेष का सूर्य - पाँचवें त्रिकोण एवं सन्तान स्थान में उच्च का होकर मित्र मंगल राशि पर बैठा है तो संतान पक्ष की विशेष शक्ति और सफलता मिलेगा और विद्या-स्थान में विशेष उन्नति करेगा तथा बुद्धि और वाणी की शक्ति में बड़ा प्रभाव और चमत्कार पावेगा तथा धर्म और ईश्वर सम्बन्ध में बड़ा ज्ञान प्राप्त करेगा और सातवीं नीच दृष्टि से लाभ स्थान को शत्रु शुक्र की तुला राशि देख रहा है इसलिये आमदनी के मार्ग में कमजोरी प्राप्त रहेगी और लाभोन्नति के मार्ग में कुछ सज्जनता की शक्ति का दुरुपयोग करना पड़ेगा तथा बुद्धि और वाणी की प्रखरता एवं तेजी के कारणों से लाभ के मार्ग में हानि के कारण बनेंगे।
धनु लग्न में यदि वृषभ का सूर्य - छठें शत्रु स्थान में शुक्र की राशि पर बैठा है, तो छठें स्थान पर गरम ग्रह शक्तिशाली फल का दाता बन जाता है, इसलिये शत्रु पक्ष में बड़ा भारी प्रभाव स्थापित रखेगा तथा बड़े-बड़े झगड़े झंझटों के मार्ग में भाग्य की से सफलता प्राप्त करेगा और झगड़े झंझटों के मामले में दिक्कतों के मार्ग से ही भाग्य का विकास पावेगा किन्तु प्रकट रूप से भाग्य के स्थान में कुछ कमी महसूस होगी, सातवी दृष्टि मित्र मंगल की राशि पर दृष्टि होने बाहरी संबंधों से लाभ की प्राप्ति होगी ।
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