तुला लग्न में यदि मकर का सूर्य- चौथे केन्द्र माता एवं भूमि के स्थान में शत्रु शनि की राशि पर बैठा है तो आमदनी पक्ष के कुछ नीरसता युक्त सुख की प्राप्ति करेगा तथा माता के सुख सम्बन्धों में कुछ कमी रहेगी और भूमि मकानादिक की शक्ति का कुछ अधूरा सुख प्राप्त करेगा तथा आमदनी के मार्ग में कुछ सुख पूर्वक प्राप्ति करने की विशेष चेष्टा होते हुए भी कुछ अशांत युक्त थोड़ा-सा वातावरण रहेगा और सातवीं मित्र दृष्टि से राज्य एवं पिता, कारोबार भाव पर दृष्टि होने से कारोबार बहुत बढ़िया रहेगा ।
तुला लग्न में यदि सूर्य संतान एवं विद्या के स्थान में शत्रु शनि की राशि पर बैठा है तो बुद्धि योग से लाभ पायेगा तथा संतान पक्ष का नीरसता युक्त लाभ मिलेगा तथा विद्या के ग्रहण करने में कुछ कठिनाईयों से सफलता मिलेगी और गरम ग्रह की राशि पर गरम ग्रह बैठा है, इसलिये बोलचाल एवं बातचीत के अन्दर मिठास की कमी और स्वार्थ की विशेषता रहेगी तथा सातवीं दृष्टि से स्वयं अपनी सिंह राशि में लाभ स्थान स्वक्षेत्र में देख रहा है, इसलिये बुद्धि योग के कठिन कर्म से आमदनी की अच्छी शक्ति पायेगा; किन्तु दिमाग में कुछ खिन्नता रहेगी।
तुला लग्न में यदि मीन का सूर्य - छठें शत्रु स्थान में मित्र गुरु की राशि पर बैठा है तो आमदनी के मार्ग में कुछ दिक्कतों के योग से लाभ प्राप्त करेगा तथा प्रभाव शक्ति से बहुत फायदा पायेगा और शत्रु स्थान में एवं झगड़े-झंझटों के मार्ग में लाभ और विजय प्राप्त करेगा, किन्तु लाभ के लिये परिश्रम करना पड़ेगा और सातवीं मित्र दृष्टि से खर्च के स्थान को बुध की कन्या राशि में देख रहा है, इसलिये खर्चा खूब करेगा और बाहरी स्थानों के सम्बन्धों में लाभ की सूरतें पायेगा और बड़ी बहादुरी एवं हिम्मत शक्ति के द्वारा आमदनी को प्राप्त करता रहेगा तथा रोगादिक पक्ष में लाभ युक्त रहेगा।
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