• कर्क लग्न (राशि) में बारह भावों सूर्य का फल-

    कर्क लग्न में यदि प्रथम भाव में सूर्य है तो देह के केन्द्र में मित्र चन्द्र की राशि पर बैठा है तो द्वारा धन की शक्ति प्राप्त करेगा और कुटुम्ब का योग पायेगा तथा देह में तेज और प्रभाव की शक्ति रखेगा, क्योंकि दूसरे व्यक्तियों की दृष्टि में धनवान् और इज्जतदार समझा जायेगा और घन स्थान का स्वामी ग्रह कुछ बन्धन का सा कार्य करता है, इसलिये धन कुटुम्ब के कारणों से देह में कुछ घिराव और परेशानी अनुभव करेगा तथा सातवीं शत्रु दृष्टि से स्त्री स्थान को शनि की मकर राशि में देख रहा है. इसलिये स्त्री पक्ष में कुछ झंझट और नीरसता प्राप्त करेगा और रोजगार के मार्ग में कुछ परेशानी युक्त धन लाभ प्राप्त करेगा।

    कर्क लग्न में यदि सिंह का सूर्य- धन भवन में स्वयं अपनी राशि का मालिक होकर स्वक्षेत्री बैठा है तो धन भवन में शक्ति प्राप्त करेगा और धन के कारणों से प्रभाव और प्रतिष्ठा पायेगा तथा कुटुम्ब की शक्ति प्राप्त होगी, किन्तु गरम ग्रह होने के कारणों से धन-जन की स्थिति में कोमलता की कमी प्राप्त रहेगी तथा सातवीं शत्रु दृष्टि से आयु स्थान को शनि की कुम्भ राशि में देख रहा है, इसलिये धन-जन की रक्षा और वृद्धि करने के कारणों से जीवन की दिनचर्या में कुछ अशांति अनुभव करेगा और पुरातत्व शक्ति के लाभ स्थान में कुछ नीरसता मानेगा तथा प्रभाव की शक्ति से धन की वृद्धि के कारणों को उत्पन्न करता रहेगा।


    कर्क लग्न में यदि सूर्य तीसरे स्थान पर हो तो अपने बाहुबल से धन प्राप्त करेगा तथा धन के कारणों से प्रभाव की वृद्धि पायेगा, क्योंकि तीसरे स्थान पर गरम ग्रह शक्ति शाली कार्य करता है, इसलिये धन के कारणों से बड़ी भारी हिम्मत शक्ति और प्रभाव और मान प्राप्त करेगा तथा सातवीं दृष्टि से भाग्य स्थान को मित्र गुरु की मीन राशि में देख रहा है, इसलिये धन और पराक्रम के करणों से भाग्य की वृद्धि करेगा और धर्म का पालन करेगा तथा भाग्य स्थान में प्रभाव और यश प्राप्त करेगा तथा और पुरुषार्थ दोनों की मान्यता रखेगा।

    कर्क लग्न में यदि तुला का सूर्य- चौथे केन्द्र माता के स्थान पर नीच का होकर शत्रु शुक्र की राशि में बैठा है तो धन संग्रह शक्ति के अभाव से दुख अनुभव करेगा अर्थात् धन कोष त्रुटि युक्त रहेगा और माता के सुख सम्बन्ध में कमी और वियोग प्राप्त करेगा तथा कौटुम्बिक सुख की कमी प्राप्त करेगा तथा रहने के स्थान में सुख की कमी प्राप्त करेगा और सातवीं उच्च दृष्टि से राजस्थान को मित्र मंगल की मेष राशि में देख रहा है, इसलिये पिता और करेगा तथा कारबार की वृद्धि करेगा तथा प्रतिष्ठा लिये धन और सुख शान्ति की परवाह नहीं करेगा। राज-समाज में मान प्राप्त और उन्नति प्राप्त करने के

    कर्क लग्न में यदि वृश्चिक का सूर्य- पाँचवें त्रिकोण सन्तान स्थान पर मित्र मंगल की राशि में बैठा है तो धन स्थानपति होने से कुछ बन्धन का कार्य करता है, इसलिये सन्तान पक्ष के सुख में कुछ बाधा उपस्थित करेगा और कोई प्रभावशाली सन्तान प्राप्त होगी तथा विद्या स्थान में बड़ी भारी शक्ति प्राप्त करेगा तथा वाणी के अन्दर बड़ा भारी प्रभाव रखेगा और स्वभाव में गर्मी रहेगी तथा धन के कोष की वृद्धि का विशेष ध्यान रहेगा और सातवीं दृष्टि से लाभ स्थान को शत्रु शुक्र की वृषभ राशि में देख रहा है, इसलिये लाभ की शक्ति प्राप्त करते हुए भी लाभ की अधिक परवाह नहीं करेगा तथा वजनदार कीमती बातें कहने और सोचने की शक्ति रखेगा ।

     कर्क लग्न का सूर्य - छठें शत्रु स्थान में मित्र गुरु की राशि पर बैठा है तो कर्क लग्न में सूर्य धन भाव का स्वामी होने से छठे भाव में जाने से सेविंग  शक्ति में कुछ कमजोरी पायेगा तथा कुटुम्ब की शक्ति में प्रभाव और वैमनस्य दोनों ही ही प्राप्त करेगा तथा छठे स्थान पर गरम ग्रह शक्तिशाली कार्य करता है, इसलिये कुछ झगड़े-झंझट युक्त परिश्रमी और प्रभावशाली मार्ग से धन की शक्ति प्राप्त करेगा और शत्रु तथा रोग पर काबू रखेगा और सातवीं मित्र दृष्टि से खर्च स्थान को बुध की मिथुन राशि में देख रहा है, इसलिये खर्चा खुब करेगा और बाहरी स्थानों के सम्बन्ध में प्रभाव शक्ति प्राप्त करेगा तथा धन का खर्चा करने में गौरव अनुभव करेगा, इसलिये धनकोष का संग्रह करने की परवाह नहीं रखेगा।

    कर्क लग्न में यदि मकर का सूर्य- सातवें केन्द्र स्त्री स्थान में शत्रु शनि की मकर राशि पर बैठा है तो धनस्थानपति  बन्धन का सा कार्य भी करता है. इसलिये स्त्री स्थान के सुख में कमी और क्लेश का रूप प्राप्त करेगा तथा स्त्री से वैमनस्यता पायेगा और रोजगार के मार्ग में कुछ परेशानियों के योग से धन की शक्ति प्राप्त करेगा और कुटुम्ब सुख के दृष्टिकोण से गृहस्थ में कुछ झंझट प्राप्त करेगा और मूत्र-इन्द्रिय के अन्दर कभी कोई बीमारी या परेशानी का योग अनुभव करेगा तथा भोगादिक सुखों को प्राप्त करने के लिये धन की शक्ति का प्रयोग करने पर भी कुछ नीरसता रहेगी और सातवीं मित्र दृष्टि से देह के स्थान को चन्द्र की कर्क राशि में देख रहा है, इसलिये देह में प्रभाव और इज्जत प्राप्त करेगा।

    कर्क लग्न में यदि कुम्भ का सूर्य- आठवें मृत्यु स्थान में शत्रु शनि की राशि पर बैठा है तो धन की संग्रह शक्ति का अभाव प्राप्त करेगा और कुटुम्ब सुख के स्थान में क्लेश और कमी पायेगा तथा जीवन की दिनचर्या में कुछ बन्धन या घिराव-सा प्रतीत रहेगा और आयु स्थान में कभी-कभी विशेष संकट प्राप्त करेगा तथा जीवन में कुछ अमीरात का ढंग प्राप्त रहेगा, किन्तु द्वितीयेश होने के दोष के कारण से जीवन के वास्तविक आनन्द में कमी रखेगा और पुरातत्व शक्ति का लाभ कुछ नीरसता युक्त रूप में अच्छा प्राप्त करेगा और सातवीं दृष्टि से अपने धन स्थान को स्वक्षेत्रीय भाव से देख रहा है, इसलिये धन और जन की शक्ति का कुछ सहारा प्राप्त करेगा तथा उदर के अन्दर कोई बीमारी या परेशानी का योग प्राप्त करेगा। 

    कर्क लग्न में यदि  मीन का सूर्य- नवम त्रिकोण भाग्य स्थान में मित्र गुरु की राशि पर बैठा है तो भाग्य की शक्ति से धन का कोष प्राप्त करेगा और कुटुम्ब सुख प्राप्त करेगा तथा बड़ा भारी प्रभाव शाली व भाग्यवान् समझा जायेगा और धन की सू. प्रभाव युक्त मार्ग के द्वारा धन की शक्ति उपलब्ध करता रहेगा और इज्जत, मान, प्रभाव तथा यश प्राप्त करेगा और सातवीं मित्र दृष्टि से भाई के स्थान को बुध की कन्या राशि में देख रहा है, इसलिये भाई-बहिन के स्थान में कुछ प्रभाव प्राप्त करेगा और पराक्रम शक्ति से धन लाभ और सफलता प्राप्त करेगा। इसलिये बडी हिम्मत शक्ति रखेगा और स्वार्थ तथा परस्वार्थ दोनों का ठीक पालन करेगा।


    कर्क लग्न में यदि मेष का सूर्य- दसम केन्द्र राज-स्थान में उच्च का होकर मित्र मंगल की राशि पर बैठा है तो कारबार राजसमाज से खूब धन प्राप्त करेगा और पिता स्थान की इज्जत बढ़ायेगा तथा प्रभावशाली कार्य के द्वारा मान, प्रतिष्ठा और प्रभाव की शक्ति प्राप्त करेगा तथा धनवान्, इज्जतदार समझा जायेगा और किसी भी संस्था आदि में अच्छा पद प्राप्त करेगा और सातवीं नीच दृष्टि से माता स्थान को शत्रु शुक्र की तुला राशि में देख रहा है, इसलिये माता के सुख में कमी प्राप्त करेगा तथा मातृ-स्थान में और रहने के स्थान में कुछ त्रुटि या कमी पायेगा और घरेलू सुख शान्ति के अन्दर कुछ परेशानी अनुभव करेगा तथा ऊँचा कर्मेष्ठी बनेगा। 

    यदि वृषभ का सूर्य- एकादश लाभ स्थान में शत्रु शुक्र की राशि पर बैठा है तो ग्यारहवें स्थान में गरम ग्रह अधिक शक्तिशाली कार्य करता है, इसलिये धन का लाभ तो अधिक करेगा, किन्तु शत्रु राशि पर होने से लाभ प्राप्ति के मार्ग में कुछ नीरसता प्रतीत होगी और कुटुम्ब सुख में प्रेम कम रहेगा तथा धन की शक्ति से आमदनी की वृद्धि अच्छी रहेगी और लाभ प्राप्ति के मार्ग में प्रभाव और अमीरात के ढंग से सफलता विशेष प्राप्त होगी तथा सातवीं मित्र द से संतान स्थान को मंगल की वृश्चिक राशि में देख रहा है, इसलिये संतार पक्ष से धन का लाभ प्राप्त करेगा और विद्या बुद्धि के योग द्वारा धन को वृद्धि के साधन प्राप्त करेगा।

    कर्क लग्न में यदि मिथुन का सूर्य- बारहवें खर्च स्थान मित्र बुध की राशि पर बैठा है तो धन का खर्च विशेष करेगा तथा धन की संग्रह शक्ति में कमजो प्राप्त रहेगी और कुटुम्ब स्थान में सुख शक्ति क अभाव रहेगा और बाहरी स्थानों के सम्बन्ध में रहेंगे और खर्च के स्थान में प्रभाव और अमीरात का ढंग रहेगा तथा सातवीं मित्र दृष्टि से शत्रु स्थान को देख रहा है, इसलिये शत्रु पक्ष में धन की खर्च शक्ति के कारणों से अच्छा प्रभाव रखेगा और इसी हेतु रोगादिक झगड़े-झंझटों के स्थान में सफलता प्राप्त करेगा तथा खर्च शक्ति के महत्ता के सम्मुख धन संग्रह की परवाह नहीं करेगा।

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