यदि लग्न में राहु हो तो आदमी शरीर से बलवान् होता है।और माइंड शार्प होता है किन्तु इसके शरीर के ऊपर के हिन्से में कोई रोग हो । यहाँ का राहु व्यक्ति को ओवर थिंकिंग करने वाला भी बनाता है,और सिरदर्द की समस्या बनी रह सकती है,ऐसे जातक अक्सर सकीमिजाज भी होते है ।
यदि द्वितीय स्थान में राहु हो तो वह विशिष्ट बात बोलने वाला होगा अर्थात् गुप्त बात बोलने वाला या दो अर्थ की बात बोलने बाला हो । ज्योतिष में राहु को चोर माना गया है। बोर द्वितीय स्थान वाणी का स्थान है। इस कारण जिसके वितीय में राहु होगा वह कपट की वाणी बोलेगा । द्वितीय में राहु होने से मुख रोग होने की संभावना भी है । द्वितीय राहु वालों की वाणी आकर्षित होती है किसी को भी अपनी वाणी से अपना बना लेते है ।
यदि राहु तृतीय में हो तो जातक मानी , भाइयों का विरोधी, धनी, दीर्घायु, और दृढ़ बुद्धि वाला होता तथा अपने बाहुबल अपनी हिम्मत से बड़ा आदमी बनता है तृतीय का राहु राजयोग कारक होता है। यहाँ स्थित राहु को अच्छा माना जाता है
यदि चतुर्थ में राहु हो तो जातक मूर्ख, दुःख देने वाला, किन्तु मित्रों सहित होता है; ऐसा व्यक्ति अल्पायु होता है यहाँ स्थित राहु जन्मभूमि और माता के सुखों में भी कमी लाता है.परंतु यहाँ स्थित राहु राजनीति और मार्केटिंग के व्यवसाय में अच्छे परिणाम देता है ।
यदि पंचम में राहु हो तो संतान से कम सुखी अथवा संतान भी दुखी हो सकती है , कठोर हृदय और कृष (पतला) शरीर वाला हो। पेट का नीचे का बगली भाग कुक्षि बहलाता है। ऐसा व्यक्ति नाक से बोलता है अर्थात् नासिका का ज़्यादा प्रयोग करता है बोलने में परंतु अगर मित्र या शुभ राशि में बैठा हो तो तेज बुद्धि का मालिक भी बनाता है ।
यदि छठे स्थान में राहु हो तो यहाँ भी बहुत शुभ माना जाता है, किसी भी प्रकार की प्रतियोगिता में जीत दिलाता है,शत्रु हंता राहु यहाँ स्थित होने से हर प्रकार के शत्रुओं से विजय दिलाता है,परंतु यहाँ स्थित राहु कभी कभी गुप्त रोग भी दे देता है ।
सप्तम में राहू हो तो वो जातक स्वतन्त्र किन्तु अल्पबुद्धिवाना होता है ऐसा जातक पत्नी पर अक्सर सक किया करता है,ऐसे जातक या जातिका के पार्टनर से संबंध अच्छे नहीं माने जाते है,वैवाहिक जीवन के लिए यहाँ स्थित राहु अच्छे परिणाम नहीं देता है ।
यदि अष्टम में राहु हो वो बात पित से पीड़ित, कम संतान बाला, अल्पायु बोर करनेवाला होता है,ऐसे जातकों के साथ गुप्त परेशानिया हमेशा लगी रहती है,परंतु ऐसा जातक गूढ़ और पराविद्याओं में निपुण होता है ,अचानक धन भी इनके पास खूब आता है ।
यदि नवम में राहु हो तो जातक प्रतिकूल वचन बोलने वाला होता है,ऐसा जातक किसी समुदाय, नगर का नेता होता है।अधिक यात्रा करने वाला होता है,अत्यंत प्राकर्मी और साहसी होता है है,।
यदि दशम का राहु होतो जातक राजनीतिज्ञ होता है,बहुत सारे कामों को करने वाला होता है,अपने कार्यों में निपुण मार्केटिंग में ऐसे लोग बहुत सफल होते है,परंतु कैरियर में स्थिरता की कमी बनी रहती है ।
यदि एकादश भाव में राहु हो तो यहाँ स्थित राहु भी बहुत शुभ माना जाता है,यहाँ स्थित राहु जातक की सभी इच्छाओं को पूरा करने का सामर्थ्य रखता है ,बुद्धि भी बहुत तेज होती है और व्यवहार कुशल ऐसे जातक होते है,ऐसे जातक लगभग सभी सुखों को भोगते हुए जीवन को व्यतीत करते है ।
द्वादश में राहु को बहुत निकृष्ट माना जाता है। ऐसा जातक जातिका जल रोग (खासी नजला जुकाम बुखार)से पीडित रहते है,और बहुत खर्च करने वाला होता है। ऐसा व्यक्ति छिपा हुआ पाप भी खूब करते है,जन्मभूमि से भी ऐसे जातक अक्सर दूर रहते है,विदेशों से इन्हें खूब लाभ होता है, खर्चो पर नियंत्रण रखना होगा नहीं तो इनके खर्च बहुत होता है ।
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