प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में उसके प्रचलित नाम का विशेष महत्त्व होता है। परिवार, समाज, शिक्षा, कैरियर, मित्रता इत्यादि प्रत्येक कार्य क्षेत्र में मनुष्य अपने प्रसिद्ध नाम से जाना जाता है। एक अच्छा नाम जो किसी महान् व्यक्ति के नाम सदृश हो, उसके लिए जीवन पर्यन्त प्रेरणा स्रोत का काम करता है। इसी कारण हमारे प्राचीन ऋषि या ज्योतिषाचार्य जन्मराश्यनुसार बालक का नाम कुलदेवता, महान् पुरुष, देववाचक, मंगलदायक, या कुल/परम्परा के अनुरूप सार्थक नाम रखते थे। उनके अनुसार मनुष्य के आन्तरिक गुणों एवं ब्राह्म व्यक्तित्व के विकास तथा भाग्य वृद्धि में नामकरण का विशेष महत्त्व होता था-
विद्वानों ने वैसे तो जन्म नक्षत्र एवं जन्म राशि के आधार पर ही जातक का नाम रखने की आज्ञा दी है, परन्तु परिस्थिति वश किसी व्यक्ति की जन्म कुण्डली में चन्द्रस्थित जन्म राशि में तथा, प्रसिद्ध नाम राशि में अन्तर होने की स्थिति में, दोनों राशियों के अन्तर्गत अलग-अलग कार्य को करने का परामर्श दिया है।
जन्म राशि (विचार )
वर कन्या का राशि मिलान, विवाह निर्णय, गर्भाधान, पुंसवन उपनयन, मुण्डन, विवाह षोडश संस्कार एवं मांगलिक कार्य, तीर्थादि की शुभ यात्रा, राशि से गोचर ग्रहों का फल-प्रतिपादन करना इत्यादि प्रशस्त है-
प्रसिद्ध नाम राशि (विचार) -
प्रसिद्ध नाम राशि का प्रयोग गृहारम्भ, गृह प्रवेश, ज्योतिषाचार्य सांसारिक व्यवहार, व्यापार (व्यवसाय), देश-कार्य, मन्त्र-सिद्धि, दानादि के समय संकल्प कुल कार्य, पुनर्विवाह, स्वामी व सेवक के पारस्परिक सम्बन्ध, रोगशान्ति हेतु औषधी प्रयोग, ब्राह्म विवाद, मुकद्दमा, युद्ध, छूतादि क्रूर कार्यों तथा दानादि शुभ संकल्पों में नाम राशि का ही प्रयोग करना चाहिए-
जन्म राशि का ज्ञान न हो, तो नाम राशि को ही ग्रहण करें।
0 comments:
एक टिप्पणी भेजें
Please do not enter any spam link in the comment box.