यदि नवम भाव में शुभ ग्रह बैठे हों, नवम भाव को शुभ ग्रह देखते हों, नवम भाव का स्वामी सूर्य किरणों के सान्निध्य से अस्तंगत न होकर अपनी राशि या अपनी उच्चराशि में स्थित होता हुआ उत्तम स्थान में बलवान् बैठा हो तो 'भाग्य' योग होता है। ऐसे व्यक्ति का कोई काम कभी रुकता नहीं है,भाग्यवश सभी कार्य अनायास ही पूरे होते जाते है अर्थात् कम मेहनत के बावजूद सुखद परिणाम प्राप्त होते रहते है ।
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